असम में जमीन को खरीदने और बेचने को लेकर सोशल मीडिया पर एक दावा किया जा रहा है कि असम में अब अलग-अलग धर्मों के बीच जमीन की खरीद और बिक्री की अनुमति नहीं है। यह दावा भी है कि किसी हिन्दू से मुसलमान को जमीन खरीदने की अनुमति नहीं होगी। असम सरकार ने आदेश जारी किया है कि मुसलमान अब हिन्दुओं से जमीन नहीं खरीद सकेंगे।
फेसबुक पर इस दावे के साथ एक यूजर ने लिखा, ‘असम सरकार का नया आदेश: जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी पाबंदी!मुसलमान अब हिंदुओं से जमीन नहीं ले सकेंगे। क्या यह फैसला सही है?’

फैक्ट चेकः
DFRAC की टीम ने वायरल दावे की जांच में इसे भ्रामक पाया। हमें कई मीडिया रिपोर्ट्स मिलीं, जिसमें बताया गया है कि असम में अब भिन्न धर्मों के बीच जमीन की खरीद-बिक्री और ट्रांफर कठिन हो गया है। इस प्रक्रिया में पुलिस की अनुमति को अनिवार्य कर दिया गया है। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘असम सरकार ने दो भिन्न धर्म वाले लोगों के बीच जमीन की खरीद-फरोख्त और ट्रांसफर के लिए पुलिस की अनुमति अनिवार्य कर दिया है. यानी अब पुलिस की हरी झंडी के बिना किसी धर्म का व्यक्ति दूसरे धर्म वालों को जमीन नहीं बेच सकेगा. असम मंत्रिमंडल ने हाल में इस मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) नियम को मंजूरी दे दी है.’

हिन्दुस्तान और न्यूज-18 हिन्दी
वहीं हमें, न्यूज-18 हिन्दी की एक रिपोर्ट मिली, जिसमें कहा गया है, ‘नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई हिंदू अपनी जमीन किसी मुस्लिम को या कोई मुस्लिम अपनी जमीन किसी हिंदू को बेचना चाहता है, तो उसे पहले जिला प्रशासन को आवेदन देना होगा. जिला उपायुक्त यह जांच करेंगे कि क्या यह बिक्री किसी दबाव में तो नहीं की जा रही है और क्या इससे उस क्षेत्र के सामाजिक संतुलन पर कोई नकारात्मक प्रभाव तो नहीं पड़ेगा?’
वहीं, हमें इस एसओपी के संदर्भ में असम के सीएम हिमंता बिस्व सरमा का एक बयान भी मिला। जिसमें वह कहते हैं कि कैबिनेट ने अलग-अलग धर्मों से जुड़े लोगों के बीच जमीन की बिक्री और हस्तांतरण के मामलों की जांच के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को मंजूरी दी है। इस प्रक्रिया के तहत असम पुलिस की विशेष शाखा यह जांच करेगी कि जमीन के लेन-देन में किसी तरह की धोखाधड़ी या गैरकानूनी गतिविधि तो शामिल नहीं है। मंजूरी देने से पहले खरीदार के धन के स्रोत की जांच की जाएगी। साथ ही यह भी आकलन किया जाएगा कि इस तरह का सौदा सामाजिक सौहार्द को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहा या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कोई खतरा तो पैदा नहीं कर रहा। नए नियम केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि बाहरी राज्यों की गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) द्वारा बड़े पैमाने पर जमीन खरीद के मामलों पर भी लागू होंगे। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, असम में पंजीकृत स्थानीय एनजीओ को इस नियम से छूट दी जाएगी, जबकि बाहर की संस्थाओं के लिए उनके फंडिंग स्रोत और जमीन खरीदने के उद्देश्य की गहन जांच की जाएगी।
निष्कर्षः
DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि भिन्न धर्मों के बीच जमीन की खरीद और बिक्री पर प्रतिबंध नहीं लगा है। बल्कि राज्य सरकार की नई SOP के मुताबिक इस मामले पर पुलिस की अनुमति को अनिवार्य कर दिया गया है। इसलिए भिन्न धर्मों के बीच जमीन की खरीद और बिक्री पर प्रतिबंध का दावा भ्रामक है।

