सोशल मीडिया साइट एक्स (पूर्व ट्विटर) पर अरुण यादव नामक यूजर सक्रिय है। यह यूजर अक्सर ऐसे पोस्ट और वीडियो शेयर करता है, जो भ्रामक और फेक होते हैं। इस यूजर की ऑनलाइन गतिविधियां खासकर धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर झूठी सूचनाओं के इर्द-गिर्द घूमती हैं। अरुण यादव सोशल मीडिया पर अश्लील, नफ़रत, भ्रामक सूचनाएं और अपमानजनक टिप्पणियां करता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अरुण यादव के खिलाफ कर्नाटक और तेलंगाना में एफआईआर दर्ज कराई गई है, क्योंकि अरुण यादव पर आरोप है कि उसने राहुल गांधी की सैनिटरी पैड पर एडिटेड फोटो शेयर किया था। हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब अरुण यादव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से फेक या भ्रामक न्यूज शेयर किया, वह लगातार फेक और भ्रामक सूचनाएं शेयर करता रहता है। इस रिपोर्ट में हम सोशल मीडिया पर अरुण यादव के नफरती एजेंडे, विपक्षी नेताओं खासकर महिला नेताओं पर की जाने वाली अभद्र और अश्लील टिप्पणियों और फेक न्यूज तथा भ्रामक न्यूज का विस्तार से विश्लेषण कर रहे हैं- रिपोर्ट के मुख्य बिंदू इस प्रकार हैं-
- कौन है अरुण यादव?
- अरुण यादव के कई अकाउंट हो चुके हैं सस्पेंड
- अकाउंट प्रमोशन और नेटवर्किंग
- अश्लील और अपमानजनक टिप्पणियों के लिए अल्गोस्पीक
- विपक्षी नेताओं पर अपमानजनक कमेंट
- अखिलेश यादव
- राहुल गांधी
- तेज, तेजस्वी और लालू यादव
- अरविंद केजरीवाल
- महिला नेताओं पर अश्लील और विवादित टिप्पणियां
- सुप्रिया श्रीनेत
- प्रियंका चतुर्वेदी
- डिंपल यादव
- सोनिया गांधी
- रोहिणी आचार्य और प्रियंका भारती
- स्वरा भास्कर पर अपमानित टिप्पणिया
- अंबेडकरवादी नेताओं पर टिप्पणियां
- विवादित हैशटैग और उसका प्रचार
- फेक न्यूज और फैक्ट चेक
1. कौन है अरुण यादव?
अरुण यादव एक्स (पूर्व ट्विटर) प्लेटफॉर्म पर यूजरनेम @ArunKosli से सक्रिय है, उसके यूजरनेम में कोसली लिखा है, जो हरियाणा के रेवाड़ी जिले की एक तहसील है। अरुण यादव ने कई पोस्ट में खुद को कोसली का रहने वाला बताया है। अरुण यादव की ऑनलाइन गतिविधियां बताती हैं कि वह बीजेपी का समर्थक हैं, हालांकि उसने बीजेपी से जुड़े होने से इनकार किया है। अरुण यादव एक्स (पूर्व ट्विटर) प्लेटफॉर्म पर नवंबर 2022 से सक्रिय है। लेकिन यह उसका पहला अकाउंट नहीं है। इससे पहले भी उसके कई अकाउंट सस्पेंड हो चुके हैं।

2. कई अकाउंट हो चुके हैं सस्पेंडः
अरुण यादव के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की जांच के दौरान हमने पाया कि इससे पहले उसके कई अकाउंट्स को संस्पेंड कर दिया गया है। हमने जांच के दौरान के पाया कि मोदीभक्त अरूण यादव से एक फेसबुक अकाउंट संचालित है। इस फेसबुक अकाउंट पर अरुण यादव की गतिविधियों को देखा जा सकता है। इस अकाउंट की जांच में हमें कुछ पुराने स्क्रीनशॉट मिले, जिसमें हमने पाया कि अरुण कुमार द्वारा @arun9800 से एक ट्विटर अकाउंट का संचालन किया जा रहा था, जिसे ट्विटर ने सस्पेंड कर दिया था। इसके अलावा अरुण द्वारा @modibhaktkosli और @YadavYogiBhakt नाम से भी ट्विटर हैंडल संचालित किया जा रहा था। इन हैंडल्स को भी सस्पेंड कर दिया गया है।

3. अकाउंट प्रमोशन और नेटवर्किंगः
अरुण यादव सोशल मीडिया पर बेहद शातिर यूजर है। उसकी गतिविधियां बताती हैं कि वह सोशल मीडिया पर नेटवर्किंग के तकनीकों को बेहतर तरीके से जानता है। शुरुआत में जब उसके फॉलोवर्स कम थे और रीच भी ज्यादा नहीं थी, तब उसने सोशल मीडिया के नेटवर्किंग तकनीकों का इस्तेमाल करके खुद की पहुंच बनानी शुरु कर दी। इसके लिए उसने दो प्रमुख रणनीतियों का सहारा लिया, जिसमें समान विचारधारा वाले ग्रुपों से जुड़ने के लिए ज्यादा फॉलोवर्स वाले हैंडल्स के पोस्ट पर रिप्लाई करना, समान विचारधारा के समूहों से जुड़ने की अपील वाले पोस्ट के नीचें अपने हैंडल को मेंशन करना और फॉलो करके फॉलोबैक की रणनीति को अपनाना शामिल है।

4. अश्लील और अपमानजनक टिप्पणियों के लिए अल्गोस्पीकः
अल्गोस्पीक के तहत सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर ऑटोमेटेड मॉडरेशन प्रतिबंधों से बचने के लिए अश्लील, गाली-गलौज और अपमानजनक शब्दों को लिखने के लिए कोडवर्ड्स लिख दिए जाते हैं, या फिर गाली वाले शब्दों के बीच में स्टार या हैशटैग जैसे सिंबल्स का इस्तेमाल किया जाता है। अरुण यादव ने बहुत कम बार सीधे तौर पर गाली या फिर अपमानजनक शब्द इस्तेमााल किए हैं। हालांकि वह सीधे गाली-गलौज की जगह कोडवर्ड्स इस्तेमाल करता है। उसने एक लंबी पोस्ट में लोगों को बताया भी था कि कैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर ऑटोमेटेड मॉडरेशन प्रतिबंधों से बचने के लिए गालियों, अपमानजनक और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जा सकता है। यहां अरुण यादव के पोस्ट की स्क्रीनशॉट में हाइलाइट किए शब्दों को आप आसानी से देख सकते हैं कि कैसे वह अल्गोस्पीक का इस्तेमाल करके अपमानजनक कमेंट करता है। इसी अल्गोस्पीक के जरिए अरुण यादव के किए गए अपमानजनक पोस्ट्स और कमेंट्स का आगे विवरण दिया गया है।

5. विपक्षी नेताओं पर अपमानजनक कमेंटः
अरुण यादव विपक्षी नेताओं अखिलेश यादव, राहुल गांधी, लालू प्रसाद यादव, मल्लिकार्जुन खड़गे, तेजस्वी यादव और अरविंद केजरीवाल पर विवादित टिप्पणियां करता है। उनकी तस्वीरों को एडिट करके उन्हें अपमानजनक शब्दों के साथ पोस्ट करता है। वह ऐसे भड़काऊ शब्दों को लिखता है, जिससे इन नेताओं के समर्थक या कार्यकर्ता टिप्पणी करें, जिससे उसके कंटेंट की रीच बढ़ती चली जाए।
अरुण यादव डिजिटल गाली-गलौज और अभद्रता का एक उदाहरण नीचे दिए जा रहे एक स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है जहां उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ छेड़-छाड़कर उस पर गाली वाले शब्द लिखे हैं। यह एडिटेड फोटो उसने लालू प्रसाद यादव के नाम से बने पैरोडी अकाउंट को रिप्लाई में पोस्ट किया है।

5.1 अखिलेश यादवः
अरुण यादव के निशाने पर सबसे ज्यादा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव रहते हैं। अखिलेश यादव और उनके समर्थकों के लिए अरुण यादव एक शब्द ‘यदमुल्ला’ लिखता है, वह खुद को इस ‘यदमुल्ला’ शब्द का जनक भी कहता है। एक पोस्ट में अरुण यादव ने खुद यदमुल्ला शब्द का मतलब बताया है, ‘यदमुल्ला मतलब यादव-मुल्ला अर्थात वो यादव जो नमाजवादी मुसलमान बन चुके हैं’।

अरुण यादव ने अखिलेश यादव के लिए किए गए लगभग सभी पोस्ट में उन्हें यदमुल्ला कहा है। इसके अलावा उसने अखिलेश यादव के लिए सुअर अलिशेखुद्दीन, ठरकी, ठरकुल्ला, टोंटीउद्दीन जैसे शब्द कहें हैं। इसके अलावा अरुण यादन ने एक पोस्ट में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के लिए गाली इस्तेमाल किया है, जिसे यहां लिखा नहीं जा सकता है। वहीं अरुण यादव ने अखिलेश यादव को अपमानित करते हुए कई ऐसे एडिटेड फोटो शेयर किए हैं, जिसमें अखिलेश यादव की तस्वीर लगी है।


5.2 राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गेः
अरुण यादव के निशाने पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी रहे हैं। अरुण यादव ने मल्लिकार्जुन खड़गे को निशाना बनाते हुए कई बार नस्लीय और अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। एक वायरल पोस्ट में उसने खड़गे की त्वचा के रंग और शारीरिक बनावट का मजाक उड़ाते हुए उन्हें वेस्टइंडीज के मशहूर क्रिकेटर क्रिस गेल का “बड़ा भाई” बताया है। यह टिप्पणी पूरी तरह से नस्लीय पूर्वाग्रह और रंगभेद से प्रेरित है। इतना ही नहीं, एक अन्य पोस्ट में अरुण यादव ने खड़गे के लिए “काला गैंडा” जैसे अपमानजनक और अमर्यादित शब्द का प्रयोग किया है, जो न सिर्फ व्यक्तिगत आघात पहुंचाने वाला है, बल्कि यह दलित समुदाय से आने वाले खड़गे के प्रति भी एक गहरे पूर्वाग्रह और नफरत को उजागर करता है। राहुल गांधी के खिलाफ भी अरुण यादव ने सोशल मीडिया पर विकृत और एडिट की गई तस्वीरें साझा की हैं। इनमें राहुल गांधी के चेहरे के साथ अशोभनीय छेड़छाड़ कर उन्हें हास्यास्पद और अपमानजनक रूप में प्रस्तुत किया गया है। इन तस्वीरों को जानबूझकर इस मकसद से फैलाया गया है कि राहुल गांधी की राजनीतिक और सामाजिक छवि को धूमिल किया जा सके।

अरुण यादव द्वारा कई पोस्ट में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए मां-बहन की गाली के शब्द इस्तेमाल किए गए हैं। एक पोस्ट में अरुण यादव कहता है कि उसका उद्देश्य कांग्रेस के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं होता है, बल्कि उन्हें जलील करना होता है। यह एक प्रकार की स्वीकारोक्ति है कि वह ऐसा जानबूझकर कर रहा है, जिससे लोगों के मान-सम्मान को ठेस पहुंचाया और उनको सोशल मीडिया पर अपमानित किया जाए।

5.3 तेज, तेजस्वी और लालू प्रसाद यादवः
अरुण यादव का सोशल मीडिया व्यवहार अक्सर नफरत और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल से भरा होता है। उसने ‘यदमुल्ला’ जैसे आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग राष्ट्रीय जनता दल के शीर्ष नेताओं लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के लिए भी किया है। इस शब्द का प्रयोग करते हुए उसने एक पोस्टर शेयर किया, जिसमें उसने स्वयं को ‘यदुवंशी’ बताते हुए तेजस्वी यादव के लिए ‘यदमुल्ला’ जैसे शब्दों से उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की।
इतना ही नहीं, अरुण यादव ने एक अन्य पोस्ट में लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को निशाना बनाते हुए और भी अधिक अपमानजनक टिप्पणी की। उसने तेज प्रताप की वैचारिक प्रतिबद्धताओं और राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाने के बजाए, व्यक्तिगत हमला करते हुए लिखा कि तेज प्रताप को यह साबित करने के लिए “डीएनए टेस्ट” कराना चाहिए कि वह वाकई लालू प्रसाद यादव के पुत्र हैं। यह टिप्पणी न सिर्फ अशोभनीय है, बल्कि यह परिवार की निजता और गरिमा पर सीधा आघात है।

5.4 अरविंद केजरीवालः
अरुण यादव का सोशल मीडिया पर व्यवहार लगातार घृणा, अपमानजनक भाषा और व्यक्तिगत हमलों से भरा हुआ रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी उसके निशाने पर रहे हैं। उसने केजरीवाल के खिलाफ कई बार बेहद अभद्र, अश्लील और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया है, जो न केवल राजनीतिक असहमति को असभ्य रूप में प्रस्तुत करता है, बल्कि यह एक तरह की सोशल मीडिया हिंसा भी है। एक पोस्ट में उसने केजरीवाल के लिए कोडवर्ड में गाली वाले शब्द जैसे ‘महा मादर’ जात’ लिखा है। इसके अलावा एक पोस्ट में केजरीवाल की वीडियो के साथ छेड़छाड़ करते हुए और उसे गलत संदर्भों में दिखाते हुए केजरीवाल को पाकिस्तान का हमदर्द दिखाने की कोशिश की गई है।

6- महिला नेताओं पर अश्लील और विवादित टिप्पणियाः
सोशल मीडिया पर महिला नेताओं की ट्रोलिंग होती रही है। उनको ट्रोल करने के लिए तमाम तरह की संज्ञाएं दी जाती हैं। लेकिन अरुण यादव ना सिर्फ गाली-गलौज और अपमानजनक शब्द इस्तेमाल करता है, बल्कि महिला नेताओं की पहचान और अस्तित्व को लेकर अभद्र टिप्पणियां करता है। इन महिला नेताओं पर वह सेक्सिस्ट, बॉडी शेमिंग और मिसोजिनिस्ट कमेंट करता है। इसके निशाने पर विपक्ष वह महिला नेता रहती हैं, जो खासतौर पर प्रवक्ता की हैसियत की अपनी पार्टी का मजबूती से पक्ष रखती हैं। इनमें सोनिया गांधी, सुप्रिया श्रीनेत, प्रियंका चतुर्वेदी, डिंपल यादव और रोहिणी आचार्य जैसी महिला नेता शामिल हैं।
6.1 सुप्रिया श्रीनेतः
कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत को टारगेट करते हुए अरुण यादव ने बार-बार बेहद अश्लील और भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया है। सुप्रिया श्रीनेत द्वारा जब किसी राजनीतिक मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त की जाती है, तो अरुण यादव पोस्ट की रिप्लाई में भद्दे कमेंट करता है। उसके कमेंट सुप्रिया श्रीनेत की शारीरिक बनावट और पहनावे को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करता है। अरुण यादव ने सुप्रिया श्रीनेत के लिए “छिनाल”, “पप्पू का पि*वाड़ा चाटने का हुनर”, और “सुप्रिया का पि*वाड़ा 56 इंच होने” जैसे शब्दों का प्रयोग किया है। ये सभी टिप्पणियां न केवल व्यक्तिगत हमले हैं, बल्कि एक महिला की गरिमा, उसकी शारीरिक पहचान और राजनीतिक भागीदारी को अपमानित करने का प्रयास हैं।

6.2 प्रियंका चतुर्वेदी
अरुण यादव ने शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियां की हैं, जो सोशल मीडिया पर सार्वजनिक संवाद की मर्यादा और न्यूनतम मानवीय गरिमा के खिलाफ हैं। प्रियंका चतुर्वेदी के खिलाफ अरुण यादव की टिप्पणियां न केवल राजनीतिक असहमति को दर्शाती हैं, बल्कि महिलाओं के प्रति घृणित मानसिकता और सेक्सिस्ट सोच को भी उजागर करती हैं। अरुण यादव द्वारा प्रियंका चतुर्वेदी को “उद्धव ठाकरे की टट्टी खाने वाली” और “उद्धव की बीवी बनेगी” जैसे अपमानजनक और भद्दे शब्दों से संबोधित किया, जो न केवल एक महिला नेता की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि सार्वजनिक विमर्श में स्त्री-विरोधी सोच को बढ़ावा देते हैं।

6.3. डिंपल यादव
अखिलेश यादव की पत्नी और मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव के खिलाफ भी अरुण यादव द्वारा लगातार अपमानित करने वाली टिप्पणियां की जा रही हैं। वक्फ बिल का विरोध करने पर अरुण यादव ने डिंपल यादव को “कन्वर्टेड” और “नकली हिन्दू” कहकर उनकी धार्मिक पहचान और आस्था पर प्रहार किया था। अरुण यादव की डिंपल यादव पर घटिया सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। उसने कई बार अश्लील टिप्पणी भी की है। समाजवादी पार्टी के एक समर्थक पर रिप्लाई करते हुए उसने अश्लील और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हुए लिखा कि “डिंपल भौजी के घाघरे में छुप गया क्या”। इसके अलावा अरुण यादव ने “डिंपल भौजी मुजरा करते अच्छा लगेंगी क्या?” और “ना नौ मन तेल होगा, ना डिंपल भौजी नाचेगी” जैसे भद्दे और लज्जाजनक जुमलों से भी संबोधित किया है। इन टिप्पणियों में गहरे स्तर पर लैंगिक अपमान, सांस्कृतिक हिंसा और स्त्री विरोधी मानसिकता मौजूद है, जो यह दर्शाती है कि किस तरह महिला नेताओं की छवि को उनके कार्य और योगदान से हटाकर उन्हें केवल शारीरिक या पारिवारिक पहचान तक सीमित करने की कोशिश की जाती है।

6.4 सोनिया गांधीः
सोनिया गांधी पर अरुण यादव ने नफरत, अश्लीलता और चरित्र हनन की पराकाष्ठा को पार किया है। उसने सोनिया गांधी की एक तस्वीर को एडिट कर उन्हें एक पुरुष को गोद में बैठाए हुए दिखाया, जो न केवल बेहद अश्लील है बल्कि एक महिला नेता की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य भी है। इतना ही नहीं, अरुण यादव ने बार-बार सोनिया गांधी के चरित्र पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करते हुए उनके बेटे राहुल गांधी की वैधता तक पर सवाल उठाया है। उसने राहुल गांधी को “राहुल तो राजीव का बेटा भी नहीं है, क्वात्रोकी का खून है” कहकर एक साजिशन झूठ फैलाने की कोशिश की है, जो दशकों पुराने दुष्प्रचार का हिस्सा रहा है। एक अन्य पोस्ट में अरुण यादव ने एक फोटो को एडिट कर खुद को सोनिया गांधी के साथ “नाचता हुआ” दिखाया है। यह अश्लील इरादे से तैयार किया गया एक डिजिटल रूपांतरण है, जो सीधे-सीधे महिला की सार्वजनिक छवि को बदनाम करने का प्रयास है।

6.5 रोहिणी आचार्य और प्रियंका भारतीः
अरुण यादव ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी और राजनीतिक में सक्रिय रोहिणी आचार्य के लिए “कुतिया” जैसे घृणित शब्द का प्रयोग किया है, जो सीधे तौर पर महिला की गरिमा और उसकी मानवीय पहचान पर हमला है। रोहिणी आचार्य ने एक बेटी के रूप में अपने पिता लालू यादव को किडनी दान कर मानवता और पारिवारिक समर्पण का एक उदाहरण पेश किया था, लेकिन अरुण यादव जैसे लोगों ने उसका भी मजाक उड़ाया और उसे घटिया टिप्पणियों में तब्दील कर दिया। इसी तरह उसने आरजेडी की प्रवक्ता प्रियंका भारती को भी “कुतिया”, “चौड़े दांत वाली” और “जेएनयू की गंदगी” जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया। इन टिप्पणियों में वर्ग, जाति, लुक्स और शैक्षणिक संस्थानों को जोड़कर गाली देना प्रतीत होता है।

7. स्वरा भास्कर पर अपमानित टिप्पणियां:
बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर के खिलाफ भी अरुन यादव ने विवादित और अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। उसने स्वरा भास्कर को ‘सुअरा भास्कर’ जैसे घृणित शब्द लिखे हैं, जो यह दर्शाते हैं कि सोशल मीडिया पर महिलाओं के प्रति उसकी सोच कितनी दूषित है।

8. अंबेडकरवादी नेताओं पर टिप्पणियां:
अरुण यादव ने एक पोस्ट में आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद के लिए “भीमटा” और “नीच” जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया है। ये शब्द न केवल व्यक्तिगत हमले हैं, बल्कि एक पूरी विचारधारा और सामाजिक आंदोलन को अपमानित करने की कोशिश हैं, जो डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों पर आधारित है। “भीमटा” जैसे शब्द का प्रयोग वह अक्सर अंबेडकरवादी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए करता है, जिसका मकसद उन्हें नीचा दिखाना और उनके आंदोलन को बदनाम करना है। यह एक सुनियोजित ट्रोलिंग का हिस्सा है, जिसमें जातीय पूर्वाग्रह और वर्चस्व की सोच खुलकर सामने आती है।

9. विवादित हैशटैग और उसका प्रचारः
अरुण यादव की सोशल मीडिया गतिविधियां न सिर्फ व्यक्तिगत गाली-गलौज तक सीमित हैं, बल्कि वह योजनाबद्ध तरीके से घृणा फैलाने वाले हैशटैग अभियान भी चलाता है, जिनका उद्देश्य विशेष समुदायों, राजनीतिक दलों और नेताओं को बदनाम करना, उनके खिलाफ नफरत भड़काना और समाज में ध्रुवीकरण पैदा करना है। उसके द्वारा चलाए गए कुछ प्रमुख हैशटैग जैसे- #यदमुल्ले_MC_है, #अलिशेखुद्दीन_यदमुल्ला, #ममता_नहीं_कुलटा_है, और #यदमुल्लो_का_बाप_अरूण_कोसली।
#यदमुल्ले_MC_है और #अलिशेखुद्दीन_यदमुल्ला जैसे हैशटैग न केवल जातीय और धार्मिक विद्वेष को बढ़ावा देते हैं, बल्कि इनमें यादव समुदाय और मुस्लिम समाज दोनों को एक साथ गाली दी गई है। ‘यदमुल्ला’ शब्द खुद में जाति और धर्म दोनों का अपमान करने वाला बनावटी गाली शब्द है, जिसे बार-बार दोहराकर अरुण यादव ने एक तरह की डिजिटल लिंचिंग की भाषा तैयार की है। #ममता_नहीं_कुलटा_है जैसे हैशटैग के जरिए उसने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा और अश्लील हमला किया। ‘कुलटा’ शब्द महिलाओं को नीचा दिखाने के लिए प्रयुक्त एक अपमानजनक गाली है, जो महिला नेतृत्व के खिलाफ उसकी गहरी नफरत और पितृसत्तात्मक मानसिकता को दर्शाता है।

10. फेक और भ्रामक सूचनाएं:
अरुण यादव ने कई मौकों पर फेक और भ्रामक सूचनाएं भी शेयर की हैं। DFRAC की टीम ने अलग-अलग मौकों पर अरुण यादव द्वारा फैलाए गए फेक और भ्रामक सूचनाओं का फैक्ट चेक किया है। यहां हम उनमें से कुछ फेक और भ्रामक सूचनाओं का फैक्ट चेक प्रदान कर रहे हैं।
फेक/भ्रामक सूचना-1
अरुण यादव ने एक शादीशुदा जोड़े की एक तस्वीर शेयर कर दावा किया कि उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में आमिर नाम के शख्स को अपनी सगी बहन फातिमा से प्यार हो गया, जिसके बाद दोनों ने निकाह कर लिया।
फैक्ट चेकः
DFRAC की जांच में पाया कि वायरल तस्वीर कथावाचक देवी चित्रलेखा की शादी की है। इस तस्वीर को देवी चित्रलेखा के गौ सेवा धाम अस्पताल एवं विश्व संकीर्तन टूर ट्रस्ट के मीडिया को-ऑर्डिनेटर राहुल शर्मा तिवारी ने वर्ष 2017 में शेयर किया था।

फेक/भ्रामक सूचना-2
पिछले दिनों पटना के शिक्षक खान सर की शादी की चर्चा होती रही। घूंघट में खान सर की पत्नी की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं। इस बीच अरुण यादव सहित कुछ लोगों ने दावा किया था कि खान सर ने दिव्यांशी मैम से शादी की है।
फैक्ट चेकः
DFRAC की टीम को जांच के दौरान नवभारत टाइम्स और एबीपी न्यूज सहित कई मीडिया रिपोर्ट्स मिलीं, जिसमें खान सर की पत्नी का पूरा नाम ऐमन सिद्दीक़ी उर्फ ज़ीनत बताया गया है। वह सिवान ज़िले की रहने वाली हैं और वह खान सर की दूर की रिश्तेदारी भी हैं।

फेक/भ्रामक सूचना-3
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की एक शख्स के साथ तस्वीर शेयर कर दावा किया गया कि वह पाकिस्तान के सांसद सैफुल्लाह के साथ हैं। अरुण यादव ने भी इस तस्वीर को शेयर कर अखिलेश यादव पर सवाल खड़े किए थे।
फैक्ट चेकः DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि यह दावा गलत है। वायरल तस्वीर में अखिलेश यादव के साथ भारतीय मूल के कारोबारी आशीष सराफ हैं। आशीष सराफ की फोटो गैलरी में उनकी भारत के कई पूर्व राष्ट्रपतियों, उपराष्ट्रपतियों और नेताओं के साथ तस्वीरें पोस्ट की गई हैं।

फेक/भ्रामक सूचना-4
अरुण यादव ने एक परिवार की तस्वीर शेयर कर एक घटना का विवरण लिखा है, जिसमें रोहिंग्याओं की भीड़ रात में एक घर में जबरदस्ती घुसकर पूरे परिवार की हत्या कर देती है।
फैक्ट चेकः
वायरल तस्वीर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में आरएसएस कार्यकर्ता बंधुप्रकाश पाल और उनके परिवार की है, जिनकी हत्या वर्ष 2019 में विजयादशमी के दिन कर दी गई थी। पुलिस ने इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी उत्पल बेहरा को गिरफ्तार किया था।

फेक/भ्रामक सूचना-5
21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर मुस्लिम समुदाय के व्यक्तियों की योग करते तस्वीर को अरुण यादव ने सऊदी अरब का बताकर शेयर किया था।
फैक्ट चेकः DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि वायरल तस्वीर सऊदी अरब की नहीं है और यह हाल-फिलहाल की तस्वीर भी नहीं है। डीडी न्यूज ने वर्ष 2017 में इस तस्वीर को शेयर करते हुए बताया था कि अबुधाबी में बोहरा समुदाय के लोगों ने योगा सत्र में भाग लिया।

फेक/भ्रामक सूचना-6
अरुण यादव ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक वीडियो शेयर कर दावा किया कि ममता ने हिन्दू धर्म को एक गंदा धर्म बताया है।
फैक्ट चेकः
DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि ममता बनर्जी का आधा-अधूरा बयान शेयर किया गया है। ममता बनर्जी ने अपने बयान में कहा था कि वह रामकृष्ण और स्वामी विवेकानंद के धर्म को मानती हैं, लेकिन वह उस धर्म को नहीं मानती हैं, जिसे एक पार्टी द्वारा बनाया गया है।

फेक/भ्रामक सूचना-7
अरुण यादव ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के बयान का एक इंफोग्राफिक शेयर किया था। जिसके साथ दावा है कि खामेनेई ने सुन्नी मुसलमानों और कन्वर्टेड मुस्लिमों को अपशब्द कहे हैं।
फैक्ट चेकः DFRAC की टीम ने पाया कि अयातुल्लाह अली खामेनेई ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। उनका फेक बयान शेयर किया गया है।

फेक/भ्रामक सूचना-8
अरुण यादव ने एक तस्वीर को शेयर करते हुए इसे पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस का बताया था।
फैक्ट चेकः
DFRAC की टीम ने जांच में पाया कि यह तस्वीर नूर खान एयरबेस की नहीं है। यह तस्वीर यूक्रेन के यह चेरनोबिल परमाणु दुर्घटना की है, जिसे फोटोग्राफर बर्नहार्ड लुडविग ने क्लिक किया था।

निष्कर्षः
सोशल मीडिया पर अरुण यादव की गतिविधियां एक बेहद खतरनाक और जहरीली ट्रोल संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिसमें राजनीति, धर्म, जाति और लिंग के आधार पर सुनियोजित नफरत फैलाया जा रहा है। उसने महिला नेताओं के खिलाफ सेक्सिस्ट, बॉडी शेमिंग, अश्लील और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया है, जिसमें सोनिया गांधी, सुप्रिया श्रीनेत, प्रियंका चतुर्वेदी, डिंपल यादव, स्वरा भास्कर, प्रियंका भारती और रोहिणी आचार्य शामिल हैं। इन सभी महिला नेताओं के खिलाफ अरुण यादव ने अभद्र टिप्पणियों के साथ-साथ उनके शरीर, निजी जीवन और पारिवारिक रिश्तों को लेकर भी शर्मनाक टिप्पणियां कीं। इसके साथ ही, उसने जातीय और धार्मिक आधार पर भी घृणा फैलाने का अभियान चलाया। चंद्रशेखर आज़ाद और अंबेडकरवादी नेताओं को “भीमटा” और “नीच” कहकर दलित समुदाय को निशाना बनाया गया। यादव और मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने के लिए उसने “यदमुल्ला” जैसे शब्द प्रयोग किए हैं। वहीं उसने अपनी नफरत के प्रसार के लिए कई हैशटैग चलाए, जो एक पूरी जाति और धर्म के खिलाफ नफरत फैलाने का प्रयास है। अरुण यादव केवल व्यक्तिगत ट्रोल नहीं है, बल्कि वह एक संगठित, डिजिटल नफरत फैलाने वाली मशीनरी का हिस्सा लगता है, जो झूठ, अश्लीलता और सांप्रदायिकता को हथियार बनाकर समाज में ज़हर घोलने का काम कर रहा है। ऐसे व्यक्ति सोशल मीडिया के असामाजिक तत्व हैं, जो एक बेहतर सामाजिक वातावरण के लिए गंभीर खतरा हैं।