फैक्ट चेक: क्या दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी की रैली पर चलाई गोली? जानिए वायरल वीडियो का सच

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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में 12 अक्टूबर को संविधान क्लब से सर्वोच्च न्यायालय तक एक रैली का आयोजन किया गया था। इस रैली से जोड़कर एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो के हवाले से दावा किया जा रहा है कि “राहुल गांधी की इस रैली पर दिल्ली पुलिस ने गोलीबारी की। इस गोलीबारी में पाँच कार्यकर्ता भी मारे गए।”

Source: X

सोशल साईट X (पूर्व ट्विटर) पर वेरिफाइड यूजर खुशी आंबेडकर ने वायरल वीडियो को शेयर कर लिखा कि राहुल गांधी की रैली में पुलिस फायरिंग के आरोप लगे हैं, जिसमें पांच कार्यकर्ताओं के मारे जाने की खबर है। दिल्ली में तनाव बढ़ गया है, क्योंकि जवाबदेही की मांग तेज हो रही है। @DelhiPolice

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वहीं एक अन्य यूजर आनुशी  तिवारी इंडियन ने भी X (पूर्व ट्विटर) वायरल वीडियो को शेयर कर दावा किया कि राहुल गांधी पर हमला। दिल्ली पुलिस ने आज राहुल गांधी की विरोध रैली पर गोलियां चलाईं, जिसमें 5 कार्यकर्ता मारे गए। #दिल्ली पुलिस ने सीधे राहुल गांधी पर गोली चलाई। हालात बिगड़ रहे हैं और तनाव बढ़ता जा रहा है। भारतवासियों, बाहर निकलो और दिल्ली को जाम कर दो। @DelhiPolice

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इसके साथ ही वायरल वीडियो को एक बार फिर से रिट्वीट कर यूजर आनुशी तिवारी इंडियन ने भी लिखा कि राहुल गांधी घायल दिल्ली पुलिस ने उन पर गोली चलाई #दिल्ली #INC #भारत

फैक्ट चेक:

वायरल वीडियो के साथ किए गए दावे की जांच के लिए DFRAC ने राहुल गांधी के नेतृत्व में 12 अक्टूबर को संविधान क्लब से सर्वोच्च न्यायालय तक आयोजित रैली से जुड़ी मीडिया कवरेज की पड़ताल की। लेकिन इस दौरान हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली। जिससे पता चलता हो कि दिल्ली पुलिस द्वारा राहुल गांधी की इस रैली पर गोलीबारी की गई हो।

Source: Facebook

ऐसे में हमने जांच को आगे बढ़ाते हुए वायरल वीडियो के कीफ्रेम को रिवर्स सर्च किया। इस दौरान हमें ऐसा ही एक पुराना वीडियो फेसबुक पर मिला। 05 मार्च 2020 को यूजर Indian Military Updates – IMU द्वारा शेयर किये गए इस वीडियो को केप्शन देते हुए लिखा गया कि “दिल्ली पुलिस को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके का एक नया वीडियो मिला है, जहां हेड कांस्टेबल रतन लाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वीडियो में देखा जा सकता है कि पुरुष और महिलाएं दिल्ली पुलिस पर पत्थर फेंक रहे हैं। इसी जगह पर डीसीपी अमित शर्मा भी घायल हो गए थे।”

Source: Times of India

इसके साथ ही हमने इस घटना से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट को भी खंगाला। ऐसे में हमें घटना से सबंधित टाईम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट भी मिली। 06 मार्च 2020 को पब्लिश हुई इस रिपोर्ट में वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉर्ट को फीचर इमेज के रूप में इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट को हेडलाइन देते हुए लिखा गया कि “दंगों के दौरान जब पत्थर बरस रहे थे, तब दिल्ली पुलिस के जवानों ने कैसे अपने साथियों को बचाया” वहीं रिपोर्ट में आगे लिखा गया कि “दो नए वीडियो सामने आए हैं, जिनसे पता चलता है कि 24 फरवरी को दंगों के दौरान चांद बाग इलाके में, भीड़ के मुकाबले बहुत कम संख्या में मौजूद दिल्ली पुलिस के जवानों ने खुद को कैसे बचाया। इन वीडियो में 2,000 से ज्यादा लोगों की भीड़—जो CAA का विरोध कर रही थी—पुलिसकर्मियों पर हमला करती दिख रही है। भीड़ उन पर पत्थर बरसा रही है और गोलियां भी चला रही है, जबकि पुलिसकर्मी सड़क के डिवाइडर के पास सिमटकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। यह वही घटना है जिसमें हेड कांस्टेबल रतन लाल की गोली लगने से मौत हो गई थी, जबकि DCP अमित शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इनके अलावा, ACP अनुज कुमार और एक दर्जन अन्य पुलिसकर्मी भी इस घटना में घायल हुए थे।”

Source: Dainik Bhaskar

इसके साथ ही हमें घटना से जुड़ी 7 साल पुरानी हिन्दी समाचार पत्र दैनिक भास्कर की भी एक अन्य रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में भी वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉर्ट को फीचर इमेज के रूप में इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट को हेडलाइन देते हुए लिखा गया कि “डीसीपी अमित शर्मा और एसीपी अनुज कुमार पर दंगाइयों ने चारों ओर से घेरकर किया था पथराव” वहीं रिपोर्ट में आगे लिखा गया कि “चांदबाग इलाके में हुई हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने सड़क पर जमकर बवाल काटा था, जिसमें शाहदरा डीसीपी अमित शर्मा और गोकुलपुरी सब डिजीवन के एसीपी अनुज कुमार फंस गए थे। पुलिस के ऊपर न केवल पथराव किया गया था बल्कि उन पर चारों तरफ से हमला भी किया। दरअसल, चांदबाग में लोग सड़क पर नागरिकता कानून के विरोध सड़क जाम कर प्रदर्शन कर रहे थे। डीसीपी अमित शर्मा और एसीपी अनुज कुमार उन्हें समझाने के लिए वहां गए थे। कम संख्या में पुलिस बल को देख अचानक से प्रदर्शनकारियों के बीच से लोगों ने पुलिस पर पथराव करना एकदम से शुरू कर दिया। भारी संख्या में उग्र भीड़ में महिलाएं भी शामिल थीं। इसी भीड़ का शिकार हेड कांस्टेबल रतनलाल बने थे, जो पुलिस अफसरों को बचाने की वजह से लोगों के बीच फंस गए। इसी दौरान हुई पत्थरबाजी और फायरिंग में रतनलाल की मौत हुई थी। किसी तरह डीसीपी और एसीपी को स्टाफ के अन्य जवानों ने बचाकर वहां से निकाला था। दूसरी वीडियो में डीसीपी अमित शर्मा को पुलिस बचाकर यमुना विहार की ओर सर्विस रोड पर ले जाते हुए नजर आई है। वहां भी पुलिस वालों को देख भीड़ ने पथराव करना शुरु कर दिया था। दोनों ही वीडियो 24 फरवरी को हुई दंगा की घटना के दौरान के हैं। वीडियो में बेकाबू हुई भीड़ को देख पुलिसकर्मियों ने ग्रिल फांदकर अपने को बचाया था।”

Source: X

अंत में हमें वायरल वीडियो के संबंध में दिल्ली पुलिस का भी खंडन मिला। सोशल साईट X (पूर्व ट्विटर) पर 12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक रूप से वायरल वीडियो के साथ किये गए दावे को खारिज करते हुए लिखा कि “इस हैंडल (@indiantiwari01) का जनता को गुमराह करने के लिए छेड़छाड़ की गई मीडिया, पुराने फुटेज और मनगढ़ंत कहानियाँ फैलाने का पुराना रिकॉर्ड रहा है। इस तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और न ही इन्हें आगे बढ़ाएं। सोशल मीडिया पर नुकसान पहुँचाने वाली अफवाहें फैलाना कानूनन दंडनीय अपराध है, और इस हैंडल के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही इस संबंध में हमने राहुल गांधी की रैली को कवर कर रहे Journo Mirror के एडिटर मुहम्मद अली से भी बातचीत की। उन्होने भी रैली पर “दिल्ली पुलिस द्वारा गोलीबारी और पांच कार्यकर्ताओं की मौत को अफवाह बताया।”

निष्कर्ष:

DFRAC की पड़ताल में सामने आया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में 12 अक्टूबर 2026 को निकाले गए मार्च पर दिल्ली पुलिस द्वारा गोलीबारी किए जाने और पांच कार्यकर्ताओं की मौत होने के दावे की पुष्टि नहीं होती। वायरल वीडियो फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके में हुई हिंसा से संबंधित है। इसलिए पुराने वीडियो को मौजूदा रैली से जोड़कर शेयर  किया जा रहा दावा भ्रामक है।

Claim Reviewदिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी की रैली पर चलाई गोली जिससे पांच कार्यकर्ताओं की हुई मौत?
Claim Byसोशल मीडिया यूज़र्स
Fact Checkभ्रामक दावा

Sources:

  1. 05 मार्च 2020 को Facebook पर पोस्ट किया गया एक वीडियो।
  2. 06 मार्च 2020 को पब्लिश टाईम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट।
  3. दैनिक भास्कर की सात वर्ष पुरानी रिपोर्टिंग।
  4. वायरल वीडियो के खंडन के सबंध में दिल्ली पुलिस का 12 अक्टूबर 2026 का आधिकारिक ट्वीट।
  5. Journo Mirror के एडिटर मुहम्मद अली का बयान।