सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के एक पुरुष कार्यकर्ता ने दिल्ली पुलिस की एक महिला अधिकारी पर हमला कर दिया।
एक पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया है कि: “दिल्ली में एक राजनीतिक झड़प के वीडियो ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और बहस छेड़ दी है। आरोप है कि कांग्रेस के एक पुरुष कार्यकर्ता ने दिल्ली पुलिस की एक महिला अधिकारी पर हमला किया। वहीं, कांग्रेस ने अपने आधिकारिक हैंडल पर यही फुटेज शेयर करते हुए महिला कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस की बर्बरता का आरोप लगाया है।” इस घटना ने जवाबदेही, महिलाओं के साथ बर्ताव और किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले पूरे संदर्भ (context) को समझने की अहमियत पर चर्चा की है। मारपीट के किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और विश्वसनीय सबूतों के आधार पर तथ्यों का पता लगाया जाना चाहिए। अहम सवाल यह है कि असल में क्या हुआ था और पूरी फुटेज से क्या सामने आता है?”
इसी तरह की अन्य पोस्ट यहां, यहां, यहां और यहां देखी जा सकती हैं।
फैक्ट:
DFRAC टीम ने इस दावे को भ्रामक पाया है। ‘रिवर्स इमेज सर्च’ के जरिए हमें NSUI की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला की एक इंस्टाग्राम पोस्ट मिली, जिसमें इसी घटना को एक अलग नज़रिए से दिखाया गया है। बराला ने बताया कि राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 7 के पास कथित “वोट चोरी” के खिलाफ प्रदर्शन करते वक़्त, उन्हें और अन्य छात्र प्रदर्शनकारियों को पुलिस की हिंसा का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस घटना को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया और इस मुद्दे को आगे भी उठाते रहने का संकल्प लिया।
पब्लिक प्रोफाइल के मुताबिक़, रितु बराला महारानी कॉलेज की पूर्व अध्यक्ष रही हैं, 2022 में राजस्थान विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में अध्यक्ष पद की उम्मीदवार थीं, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सदस्य हैं और NSUI की राष्ट्रीय सचिव के रूप में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कार्यभार संभालती हैं।
14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में इस घटना के बारे में और जानकारी दी गई है। ‘भास्कर इंग्लिश’ की रिपोर्ट के मुताबिक़, यह टकराव राजीव चौक पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद एक बस के अंदर हुआ। रिपोर्ट में बताया गया है कि बराला और दिल्ली पुलिस की एक महिला अधिकारी के बीच हाथापाई हुई, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे के बाल खींचे और मारपीट की, जिसके बाद अन्य पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव किया। ‘नवभारत टाइम्स’ ने भी इस घटना को कवर किया और बराला के उस आरोप का ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि लड़ाई की शुरुआत महिला अधिकारी ने की थी, और इसके बाद उनका मेडिकल एग्ज़ामिनेशन भी कराया गया।
इस झड़प के बाद कांग्रेस और NSUI नेताओं ने आरोप लगाए कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों, खासकर महिलाओं के साथ बुरा बर्ताव किया। 14 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, राहुल गांधी ने बराला का समर्थन करते हुए उन्हें “शेरनी” कहा और डटे रहने के लिए उनकी तारीफ की।
आगे की जानकारी के लिए हमने जर्नो मिरर के सीनियर एडिटर मोहम्मद अली से संपर्क किया और वायरल दावे के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि वह खुद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे। उनके मुताबिक, वहां कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता रितु बराला और एक महिला पुलिस अधिकारी के बीच हाथापाई हुई थी। इस हिंसक झड़प में कोई पुरुष शामिल नहीं था।
निष्कर्ष:
DFRAC की जांच के मुताबिक, वायरल वीडियो में कांग्रेस के किसी पुरुष कार्यकर्ता द्वारा महिला पुलिस अधिकारी पर हमला करते हुए नहीं दिखाया गया है। यह वीडियो NSUI नेता रितु बराला और दिल्ली पुलिस की एक महिला अधिकारी के बीच हुई हाथापाई का है। इसलिए वायरल दावे को भ्रामक पाया गया है।
| Claim Review | कांग्रेस के एक पुरुष कार्यकर्ता ने कथित तौर पर दिल्ली पुलिस की एक महिला अधिकारी पर हमला किया गया। |
| Claim By | सोशल मीडिया यूज़र्स |
| Fact Check | भ्रामक दावा |
Sources:
- रितु बराला की इंस्टाग्राम रील
- भास्कर इंग्लिश की रिपोर्ट
- नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट
- इंडियन एक्सप्रेस की इंस्टाग्राम रील
- जर्नो मिरर के सीनियर एडिटर मोहम्मद अली का बयान





