Bangladesh Hindu Atrocity

फैक्ट चेकः अमेरिका में 1937 में अश्वेतों के खिलाफ हिंसा की तस्वीर बांग्लादेश का बताकर भ्रामक दावा किया गया

Fact Check hi Featured Misleading

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इस बीच एक तस्वीर सोशल मीडिया पर बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार का बताकर शेयर की गई है। इस तस्वीर में देखा जा सकता है कि एक युवक को पेड़ से बांधा गया है और उसके हाथ-पैर भी बंधे हुए हैं।

इस तस्वीर को शेयर करते हुए Vaishali Mishra नामक यूजर ने लिखा, ‘जो लोग 1947 नहीं देखे थे वह आज का बांग्लादेश देख ले..बांग्लादेश में जो गरीब हिंदू शहरों से मजहबी चरमपंथियों से बचकर अपने बच्चे और बच्चियों को लेकर जंगल की तरफ भागे वह गरीब परिवार सिर्फ 3 महीने तक जीवित रहा उसके पश्चात मजहबी चरमपंथी उन जंगलों में जाकर पुरुषों को इस्लामी क्रूरता के तहत मार दिया गया और उनके बच्चियों के साथ बलात्कार किया क्या जो इस्लाम में कन्वर्ट हो गई उनकी जान बच गई जो कन्वर्ट नहीं हुई उन्हें बलात्कार करके मार दिया। यह सब हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुआ।’

लिंक

फैक्ट चेकः

DFRAC की टीम ने वायरल तस्वीर की जांच में पाया कि यह बांग्लादेश की तस्वीर नहीं है। यह वर्ष 1937 में अमेरिका के मिसिसिपी में अश्वेत शख्स की बेरहमी से की गई लिंचिंग की घटना की तस्वीर है। गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें यह तस्वीर स्टॉक फ़ोटोग्राफ़ी एजेंसी अलामी की वेबसाइट पर मिली, जिसके साथ जानकारी दी गई है कि यह अप्रैल 1937 की तस्वीर है।

लिंक

आगे की जांच में हमें cambridge.org की वेबसाइट पर The Asia-Pacific Journal की 2 जुलाई 2008 को प्रकाशित एक रिसर्च पेपर में यह तस्वीर मिली। जॉन ओब्रायन द्वारा लिखे गए इस रिसर्च पेपर का टाइटल है, ‘द न्यूक्लियर फैमिली ऑफ मैन’। इस लेख में तस्वीर के साथ जानकारी दी गई है, ‘मिसिसिपी लिंचिंग में मौत का मंजर (1937), यह तस्वीर 1955 में न्यूयॉर्क में ‘द फैमिली ऑफ मैन’ प्रदर्शनी खुलने के कुछ ही समय बाद हटा दी गई थी।’

लिंक

इस लेख में इस तस्वीर के बारे में बताया गया है कि 1937 में मिसिसिपी में एक अनजान फोटोग्राफर द्वारा ली गई यह तस्वीर एक अश्वेत आदमी की मौत की हालत को दिखाती थी, जिसे एक पेड़ से बांधा गया था और उसके बंधे हुए हाथ पीछे की ओर खींचे हुए थे।

निष्कर्षः

DFRAC के फैक्ट चेक से साफ है कि सोशल मीडिया पर शेयर की गई तस्वीर बांग्लादेश की नहीं है। यह तस्वीर 1937 में अमेरिका के मिसिसिपी में एक अश्वेत शख्स की लिंचिंग की घटना की है। इसलिए यूजर का दावा भ्रामक है।